भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और असैन्य परमाणु सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। इस दौरान एलएनजी आपूर्ति के बड़े समझौते को अंतिम रूप दिया गया और कई महत्वपूर्ण आशय पत्रों तथा समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
यूएई के राष्ट्रपति सोमवार को संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम दौरे पर भारत पहुंचे। प्रोटोकॉल से हटकर प्रधानमंत्री मोदी स्वयं एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी के लिए पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई और वे एक ही वाहन से बैठक स्थल की ओर रवाना हुए। लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों देशों ने 2032 तक आपसी व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2022 में हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के बाद से द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका है। अब एमएसएमई क्षेत्र के निर्यात को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशियाई बाजारों तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी है।
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। एक फ्रेमवर्क समझौते की दिशा में आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसके तहत संयुक्त प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और रक्षा उपकरणों के विकास पर काम किया जाएगा। विशेषज्ञ इसे खाड़ी क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका के रूप में देख रहे हैं।
ऊर्जा सहयोग के तहत सबसे बड़ा कदम एलएनजी समझौता है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और अबू धाबी की कंपनी एडीएनओसी गैस के बीच 10 वर्षों के लिए करार हुआ है, जिसके अंतर्गत भारत को हर साल 0.5 मिलियन मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस मिलेगी। लगभग तीन अरब डॉलर के इस समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
दोनों देश असैन्य परमाणु क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इसमें बड़े और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के विकास, परमाणु संयंत्रों के संचालन तथा उन्नत रिएक्टर प्रणालियों में तकनीकी साझेदारी शामिल है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटिंग और डाटा सेंटर विकास को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। यूएई की भागीदारी से भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने की योजना है।
गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र के विकास में भी यूएई अहम भूमिका निभाएगा। यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पायलट प्रशिक्षण केंद्र, एमआरओ सुविधा, ग्रीनफील्ड बंदरगाह और स्मार्ट टाउनशिप जैसी परियोजनाओं पर संयुक्त निवेश की रूपरेखा बनी है। अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के लिए भी आईएन-स्पेस और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच समझौता हुआ है, जिसके तहत संयुक्त मिशन, सैटेलाइट निर्माण और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
खाद्य सुरक्षा को लेकर एपीडा और यूएई के जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिससे भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात को नया बाजार मिलेगा। गिफ्ट सिटी में फर्स्ट अबू धाबी बैंक और डीपी वर्ल्ड के कार्यालय खोलने पर भी सहमति बनी है। दोनों देश ‘डाटा दूतावास’ की अवधारणा पर भी काम करेंगे।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई राष्ट्रपति का विशेष आतिथ्य किया। उन्हें गुजराती परंपरा का प्रतीक नक्काशीदार लकड़ी का झूला और कश्मीर की पशमीना शॉल भेंट की गई। राष्ट्रपति की माता के लिए भी केसर और पशमीना शॉल का उपहार भेजा गया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत–यूएई संबंधों को आर्थिक साझेदारी से आगे ले जाकर व्यापक रणनीतिक गठजोड़ में बदलने वाला साबित होगा। खासकर ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में हुई पहल आने वाले वर्षों में दोनों देशों की नई पहचान गढ़ेगी।